बात निकलेगी तो फिर Sathya Saran

ISBN: 9789351772118

Published:

Paperback

172 pages


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बात निकलेगी तो फिर  by  Sathya Saran

बात निकलेगी तो फिर by Sathya Saran
| Paperback | PDF, EPUB, FB2, DjVu, AUDIO, mp3, RTF | 172 pages | ISBN: 9789351772118 | 5.42 Mb

जिन दिनों रॉक एंड रोल और लता-रफी-किशोर-मुकेश की दिलकश आवाजें परशरवगायन की दुनिया पर पूरी तरह काबिज़ थीं, उन दिनों पंजाब के एक छोटे से शहर से मुंबई आए एक नौजवान ने अपनी मखमली आवाज़ और अपनी सहज धुनों से गजलों की दुनिया को नए सिरे से सँवारने का बीड़ा उठायाMoreजिन दिनों रॉक एंड रोल और लता-रफी-किशोर-मुकेश की दिलकश आवाजें पर्श्रव्गायन की दुनिया पर पूरी तरह काबिज़ थीं, उन दिनों पंजाब के एक छोटे से शहर से मुंबई आए एक नौजवान ने अपनी मखमली आवाज़ और अपनी सहज धुनों से गजलों की दुनिया को नए सिरे से सँवारने का बीड़ा उठायाजगजीत सिंह ही वो गायक और मौसीकार थे जिन्होंने ग़ज़लों को महफ़िलों और दरबारों की गायकी की छवि से आज़ाद किया और उसे आम जनमानस का हिस्सा बनाया: अपनी नाम धारी सिख जड़ों से निकलकर गायकी की दुनिया में कॉलेज के ज़माने से ही जगह बनाते एक युवक ने कैसे ख़्वाबों की नगरी में पहली बार अपने पैर जमाए, फिर ऐड जिंगलों की दुनिया से निकलकर ग़ज़ल की दुनिया का रुख़ किया और अपने पहले एल्बम द अनफॉरगेटेबल्स के साथ ग़ज़ल गायकी को नई परिभाषा दी, सह-कलाकार चित्रा सिंह को अपनी ज़िन्दगी का हमसफ़र बनाया, बेटे के शोक में आध्यात्मिकता में सुकून खोजने की कोशिश की और कैसे ग़ज़लों में डूबकर अपने ग़म भुलाए...बात निकलेगी तो फिर जगजीत सिंह का पहला ज़िन्दगीनामा भी है, और उनका ग़ज़लनामा भी



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